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चैत्र नवरात्र : आत्मशुद्धि और मुक्ति का आधार हैं ये नौ दिन !

धार्मिक पुराण देवी भागवत पुराण के अनुसार पूरे वर्ष में चार बार नवरात्रि होते हैं, दो गुप्त नवरात्र, तीसरा शारदीय नवरात्र और चौथा चैत्र नवरात्र, बहुत कम लोग हैं जो गुप्त नवरात्र के विषय में जानते हैं, ज्यादातर दो नवरात्र शारदीय और चैत्र नवरात्र ही अधिक प्रचलित और मान्य होते हैं।

आत्म शुद्धि का आधार है चैत्र नवरात्रिः-

हिन्दू धार्मिक पुराणों में चैत्र नवरात्र को आत्मशुद्धि और मुक्ति का आधार माना गया है, दूसरी ओर शारदीय नवरात्र को वैभव और भोग प्रदान करने वाला माना गया है, गुप्त नवरात्रि को तंत्र मंत्र की क्रियाओं के लिये उत्तम माना गया है इसलिये तंत्र मंत्र से जुड़े लोग गुप्त नवरात्रि को ज्यादा मानते हैं तांत्रिक इन दिनों को टोने टोटकों के लिये श्रेष्ठ मानते हैं, माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में किये गये टोने टोटके बहुत असरदार होते हैं।​

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पूजन का शुभ मुहूर्तः-
 
इस वर्ष चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल (मंगलवार) से शुरू हो रहे हैं, पूजन के लिये शुभ मुहूर्त 06 बजकर 09 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच रहेगा, 13 अप्रैल से शुरू होने वाले नवरात्र 22 अप्रैल को सम्पन्न होंगे।

विधि विधान से होता है पूजनः-

नवरात्रि में माँ भगवती के नौ अवतारों की प्रत्येक दिन अलग अलग अवतार की विशिष्ट पूजा की जाती है, माता के भक्त नवरात्रों में अपने घरों में कलश स्थापना करते और व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, सामान्यता नवरात्र के दिनों में माता के भक्त नौ दिन तक भगवती दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ करके केवल एक समय भोजन करते हैं।

माता के भक्त अपने घरों में अखण्ड दीप जलाते हैं जो माँ के सामने पूरे नवरात्र यानि नौ दिनों तक जलती है, नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा पूर्ण विधि विधान से की जाती है।

हुआ था सृष्टि का निर्माणः-

नववर्ष पंचांग की गणना चैत्र नवरात्र से ही शुरू होती है, धार्मिक दृष्टि से भी चैत्र नवरात्र बहुत महत्व रखते हैं क्योंकि चैत्र नवरात्र के पहले ही दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थी और देवी दुर्गा के कहने पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण कार्य आरम्भ किया था।​

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इसलिये चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष की शुरूआत भी मानी जाती है, तीसरे चैत्र नवरात्र को भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की थी, इसके बाद भगवान विष्णु का भगवान राम के रूप में अवतार भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था, इसलिये इसका महत्व बहुत अधिक है।

नकारात्मकता का होता है नाशः-

चैत्र नवरात्र में घर में पूजन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, पूजा करने वाले साधक को इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिये, माना जाता है कि नवरात्र के नौ दिन काफी शुभ होते हैं, कोई भी शुभ कार्य इन दिनों में बिना मुहूर्त के किया जा सकता है, इसका कारण यह है कि पूरी सृष्टि को अपनी माया से ढ़कने वाली आदिशक्ति इस समय पृथ्वी पर होती है।

माता के नौ भिन्न रूपः-

माता भगवती के सभी 9 रूपों की पूजा नवरात्रि में भिन्न भिन्न दिन की जाती है, आइये देखते हैं इन 9 दिनों में देवी के कौन से रूप की पूजा किस दिन की जानी चाहिये।

पहला नवरात्र - 13 अप्रैल (मंगलवार) - घट स्थापना व माँ शैलपुत्री पूजा

दूसरा नवरात्र - 14 अप्रैल (बुधवार) - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तीसरा नवरात्र - 15 अप्रैल (गुरुवार) - मां चंद्रघंटा पूजा
चौथा नवरात्र - 16 अप्रैल (शुक्रवार)मां कुष्मांडा पूजा
पाँचवां नवरात्र - 17 अप्रैल (शनिवार)मां स्कन्दमाता पूजा
छठा नवरात्र - 18 अप्रैल (रविवार) - मां कात्यायनी पूजा
सातवां नवरात्र - 19 अप्रैल (सोमवार) - माँ कालरात्रि पूजा
अष्टमी -
20 अप्रैल (मंगलवार) - मां महागौरी की पूजा, दुर्गा अष्टमी, महाष्टमी

नवमी - 21 अप्रैल (बुधवार) - राम नवमी, भगवान राम का जन्म दिवस।

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