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करें सावन शिवरात्रि पर भोलेबाबा को प्रसन्न !

19 जुलाई 2020 (रविवार)

सावन शिवरात्रि :-

तिथि - 14, श्रावण, कृष्ण पक्ष, चतुर्दशी, विक्रम संवत 

एक तो सावन का सुहावना माह, रिमझिम बरसते बादल और उस पर शिव का जयकारा, यही सब खूबियां बनाती हैं इस माह को और भी पवित्र और लुभावना। सावन का माह शिवजी का प्रिय माह है, कोई भी भक्त इस माह में शिव जी को प्रसन्न करने के लिए जो कुछ भी करता है, शिव सब स्वीकार कर लेते हैं।

सावन शिवरात्रि का महत्व :-

वैसे तो पूर्ण वर्ष में 12 से 13 शिवरात्रि आती हैं, किन्तु इन सभी में दो शिवरात्रियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं- फाल्गुन मास की शिवरात्रि और सावन शिवरात्रि। फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है और यह सबसे बड़ी शिवरात्रि है। इसके बाद सावन शिवरात्रि महत्वपूर्ण है, क्योकि सावन मास में आने के कारण यह शिव के निकट है। इस दिन भी लोग व्रत रख कर शिवलिंग की बेलपत्र आदि से उपासना करते हैं। इस माह में कांवरिये हरिद्वार, गंगोत्री आदि पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर आते हैं और शिवजी का अभिषेक करते हैं।

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सावन शिवरात्रि की व्रत विधि :-

सावन शिवरात्रि का व्रत भी महाशिवरात्रि की ही भांति किया जाता है। यह व्रत शिवरात्रि के एक दिन पहले अर्थात त्रयोदशी के दिन एक समय भोजन करके आरम्भ किया जाता है। शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद शिवजी के मंदिर जाकर अथवा घर पर शिवलिंग की पूजा करके उनका अभिषेक किया जाता है। अभिषेक के लिए पंच द्रव्य अर्थात दूध, दही, शहद, हल्दी तथा जल आदि का उपयोग किया जाता है। पुरे दिन व्रत रख कर अगले दिन इसका पारण किया जाता है, कुछ लोग उसी दिन रात्रि में भी भोजन कर लेते हैं किन्तु यदि संभव हो तो अगले दिन ही भोजन करें। शिवरात्रि के दिन रात भर जाग कर कमर सीधी रखकर ध्यान मुद्रा में बैठना तथा ॐ मन्त्र का जाप करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन शिवजी पर भांग, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाना भी शुभ होता है। सावन के महीने में उत्तर भारत में पार्थिव पूजा का भी आयोजन घर घर में किया जाता है। पार्थिव पूजा में शुद्ध मिट्टी के 108 अथवा 1008 अथवा 1100 शिवलिंग बनाये जाते हैं जिनका विधि विधान से पूजन किया जाता है और अंत में इन शिवलिंगों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।

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सावन शिवरात्रि व्रत के लाभ :-

1.) विद्यार्थियों को शिक्षा सम्बन्धी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। उनकी बुद्धि विद्या में दृढ होती है।

2.) शत्रुओं का नाश होता है, घर परिवार से कलेश का नाश होता है।

3.) शुभ कार्य बिना विघ्न के पूर्ण होते हैं।

4.) कुवारी कन्याओं को अच्छा वर प्राप्त होता है।

5.) विवाहित स्त्रियों के सुहाग की रक्षा होती है, पति की आयु बढ़ती है और संतानों की उन्नति होती है।

6.) कालसर्प योग का निवारण भी इसी माह में किया जाता है।

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