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ऋषि पंचमी: स्त्रियों से हुए पापों को क्षीण करता है यह व्रत!

ऋषि पंचमी मुहूर्त :-

ऋषि पंचमी = 23 अगस्त 2020

ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त = 11:06 से 01:41 (2 घंटे 36 मिनट)

पंचमी तिथि प्रारम्भ = 07:57  (22 अगस्त 2020)

पंचमी तिथि समाप्त = 05:04  (23 अगस्त 2020)

ऋषि पंचमी का महत्व :-

ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं द्वारा रखा जाता है, इस दिन व्रत रखकर नियम पूर्वक पूजा पाठ करने से माहवारी के समय हुई गलतियों के पापों से क्षमा मिलती है और उनका अगला जन्म सुधरता है। आज के समय में बहुत कम स्त्रियां इस व्रत के विषय में जानती हैं, किन्तु सभी महिलाओं और कन्याओं को यह व्रत करना चाहिए। यह व्रत वर्ष में एक बार अगस्त या सितम्बर माह में आता है तथा गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन अर्थात भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी को यह मनाया जाता है।

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ऋषि पंचमी की विशेषता :-

महिलाएं अपनी रजस्वला स्थिति में अपवित्र मानी जाती हैं, और ऐसे समय में स्त्रियों के लिए पुराणों में कुछ नियम बनाये गए हैं। किन्तु ज़्यादातर स्त्रियां इन नियमों को अनदेखा कर देती हैं और कई स्त्रियां इन नियमों को मानती ही नहीं, जिसके कारण उन्हें पाप लग जाता है। क्योकि माहवारी के समय स्त्रियां प्रथम तीन दिन सबसे अधिक अपवित्र मानी जाती हैं और चौथे दिन स्नान कर के वे पवित्र होती हैं ऐसे में यदि वे पहले तीन दिनों में रसोई बनातीं हैं तो उसे ग्रहण करने वाले को रोग और नकारात्मकता घेर लेती है। किन्तु यदि इन भूलों से मुक्ति के लिए स्त्री ऋषि पंचमी का व्रत करे तो उसे इन पापों से मुक्ति मिलती है।

ऋषि पंचमी पूजन विधि :-

सर्वप्रथम प्रातः काल उठकर सबसे पहले नदी में स्नान करें, यदि संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलकर साधारण जल से ही स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

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पूजा वाले स्थान को स्वच्छ करें और गाय के गोबर से लीप लें। उस स्थान पर लकड़ी की एक चौकी स्थापित करें और उस पर हल्दी से चौकोर मंडप बनाएं और उसमे सप्त ऋषि की स्थापना करें।

इसके बाद कलश की स्थापना करें और उपवास का संकल्प लें।

तत्पश्चात दीप, धूप, नैवैद्य तथा पुष्प से विधिवत पूजा करें और अंत में सात युग्मक ब्राह्मण को भोजन करा कर पारण करें।

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