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गणेश महोत्सव: क्या करें और क्या करने से बचें गणपति पूजन में?

गणेश उत्सव अपने पूरे शबाब पर है, जगह जगह गणपति के बड़े बड़े पंडाल बनाये गए हैं। सभी गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और बप्पा का आशीर्वाद ले रही है। गणपति का यह महोत्सव अत्यंत ख़ास है, कई जगहों पर इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भक्तजन घर पर भी गणपति की स्थापना करते हैं और उनकी सेवा करते हैं। गणपति जी की सेवा में कोई भूल चूक न हो इसके लिए हम आपको बतायंगे की गणपति की पूजा में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए-

मान्यता है की गणपति का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था इसलिए इसी समय उनकी पूजा करना उत्तम समय माना जाता है। गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी भी कहते हैं क्योकि इस दिन चन्द्रमा का दर्शन करने से कलंक लगता है। 

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क्या करना चाहिए?

- गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है, इसलिए गणपति को रोली लगाकर दूर्वा अर्पित करनी चाहिए। यह दूर्वा उनके शीश पर रखनी चाहिए न कि चरणों में।

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- गणपति पूजा में शंख जरूर बजाए, क्योंकि गणेश जी को शंख की ध्वनि अत्यंत प्रिय है। वैसे भी किसी भी पूजा में शंख ज़रूर बजायी जाती है। यह उस स्थान से नकारात्मकता को दूर करता है।

- गणेश भगवान को भोग के लिए मोदक अवश्य चढाने चाहिए, और साथ में केले और अन्य मिष्ठान भी चढ़ानी चाहिए। पूजा के अंत में सबको यह प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए।

 

क्या नहीं करना चाहिए?

- गणेश चतुर्थी तिथि को चन्द्रमा के दर्शन वर्जित हैं, क्योकि इस दिन चन्द्रमा का दर्शन करने से कलंक लगने की सम्भावना होती है।

- गणेश जी की पीठ का दर्शन कभी नहीं करना चाहिए, कहा जाता है की उनकी पीठ पर दुःख तथा दरित्रता का वास होता है। जो पीठ का दर्शन का दर्शन करता है दरिद्रता उसके पीछे आ जाती है।

- गणेश जी को कभी भी तुलसी नहीं अर्पित करनी चाहिए, क्योकि उन्होंने तुलसी को श्राप दिया था। इसलिए तुलसी सभी देवताओं को भले ही चढ़ती हो किन्तु गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती। 

- गणेश जी को मूर्ति को घर पर खुला नहीं लाया जाता बल्कि उनको ढक कर ही घर में लाया जाता है। तथा द्वार पर स्वागत करने के बाद जहाँ उनको स्थापित करना है वह पर रख कर कपडा हटाया जाता है।

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