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पापमोचनी एकादशीः- इस व्रत से मिलेगी सभी पापों से मुक्ति

पापमोचनी एकादशीः- 31 मार्च रविवार
तिथि प्रारम्भः- प्रातः 03ः23 (31 मार्च रविवार)
तिथि समाप्तः- प्रातः 06ः04 (01 अप्रैल सोमवार)
तिथि 11 चैत्र मास कृष्ण पक्ष एकादशी 

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पापमोचनी एकादशी सभी पापों को नष्ट करने वाली एकादशी होती है इस व्रत के प्रभाव एंवम जानकारी स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने धर्नुधर अर्जुन को दी थी पापमोचनी एकादशी हमें सभी पापों से मुक्त कर हमें मोक्ष का मार्ग दिखाती है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है इसे पूरे विधि विधान पूर्वक करने से शुभ संकेत मिलते हैं यह व्रत बहुत ही प्रभावशाली व्रत होता है इस व्रत से हमारे मन में अनुचित विचार नहीं आते तथा चंचल मन में स्थिरता आ जाती है पापमोचनी व्रत धन सम्पत्ति, पापों से मुक्ति, ऐश्वर्य तथा गुणवान विद्धान संतान प्राप्ति के लिये किया जाता है, इससे हमें अपने राहु की समस्या से भी मुक्ति मिलती है इस माह में अधिक जल पीना चाहिये इसीलिये इस व्रत में ज़्यादा जल का प्रयोग किया जाता है। 

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व्रत के नियम व लाभः-

इस व्रत को निर्जला, जलीय, फलाहार, तीन प्रकार से किया जाता है जो व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं है उसे निर्जल व्रत नहीं करना चाहिये जो स्वस्थ हैं वह किसी भी प्रकार से इस व्रत को कर सकते हैं इसमें केवल एक बार ही सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिये एकादशी के दिन प्रातः काल भगवान श्री हरि की पूजा करनी चाहिये तथा रात्रि के समय में श्री हरि का जागरण आदि करना चाहिये। इस व्रत को करने से हमें मोक्ष की प्राप्ति होती है जो पति पत्नी संतान सुख से वंचित हैं उन्हें यथा समय पर संतान की प्राप्ति होती है, अगर इस जीवन काल में कभी भी किसी भी परिस्थिति में कोई पाप अंजाने में आपसे हुआ हो तो पापमोचनी एकादशी से संपूर्ण जीवन काल के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस व्रत से मानसिक स्थिति में बढ़ोतरी होती है तथा घर में धन धान्य अनाज की कभी भी कमी नहीं रहती।

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कैसे करें व्रतः-

प्रातः काल उठकर स्वच्छ जल से स्नान करें पवित्र वस्त्रों को धारण करें दोनों हाथों को जोड़कर भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें, तत्पश्चात् केले के पौधे में जल अर्पण करें तथा पीले फूलों को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें इसके बाद श्री हरि के मंत्रों का उच्चारण करें, भगवत गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें, ॐ हरये नमःॐ हरये नमः का जाप करें। समय निकालकर निर्धनों तथा ज़रूरत मंदों को अन्न, वस्त्रों का दान करें, पीपल के वृक्ष में जल डालें उसमें पीला सूती कपड़ा बांधें और 7 बार परिक्रमा करें दीपक जलाकर मिठाई बांटें आपकी राहु की समस्या का समाधान हो जायेगा।

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पौराणिक कथाः-

वर्षों पुरानी बात है एक ऋषि मंत्रमुग्ध होकर तपस्या में लीन थे यह सब देखकर देवराज इंद्र बहुत समस्या में पड़ गये उन्होंने ठानी कि किसी भी प्रकार से इस ऋषि की तपस्या भंग करनी पड़ेगी, देवराज इन्द्र ने इसका एक उपाय निकाला उन्होंने मंजूघोषा नामक एक खूबसूरत अप्सरा को ऋषि के पास भेजा, ऋषि मुनि मंजूघोषा की खूबसूरती पर मुग्ध हो उठे उनके मन में काम इच्छायें आने लगीं, वह खुद को रोक न पाये तथा उस सुन्दरी के साथ में रहने लगे कई वर्षों तक दोनों रमण करते रहे फिर एक दिन मंजूघोषा ने ऋषि से स्वर्ग वापिस जाने के लिये आज्ञा मांगी तब अचानक ऋषि की बुद्वि जागृत हुई तथा उन्हें अपनी तपस्या का ध्यान आया उनके मन ग्लानि से भर गया, इस सबका कारण अप्सरा को मानकर ऋषि ने अप्सरा को पिशाचिनी होने का श्राप दे डाला श्राप से भयभीत अप्सरा ने ऋषि मुनि से श्राप से मुक्ति की प्रार्थना की तभी वहाँ देवर्षि नारद आ पहुँचे उन दोनों को उन्होंने पापमोचनी एकादशी व्रत करने के लिये कहा जिससे उन दोनों को अपने पाप से मुक्ति मिल जायेगी उन दोनों ने ही नारद का कहा मानकर पापमोचनी एकादशी का व्रत विधि विधान से किया फलस्वरूप वह सभी पापों से मुक्त हो गये। इस व्रत को करने से ब्रह्महत्या, स्वर्ण चोरी इत्यादि सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है इस व्रत को बहुत ही फलदायी माना जाता है।

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