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Guru Ravidas Ji

Join Date : 2019-04-09

संक्षिप्त परिचय

गुरु रविदास जी 15 वीं-16 वीं शताब्दी के एक महान संत, दार्शनिक, कवि, समाज सुधारक और भगवान के अनुयायी थे। निर्गुण सम्प्रदाय के ये बहुत प्रसिद्ध संत थे, जिन्होंने उत्तरी भारत में भक्ति आन्दोलन का नेतृत्व किया था। 
गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी के पास सीर गोबर्धनगाँव में हुआ था। इन्हे कई नामो से भी जाना जाता है - जैसे रैदास, रोहिदास, रूहिदास आदि। इनकी माता कलसा देवी एवं पिता संतोख दास जी थे।  रविदास जी के जन्म 1376-77 के बीच हुआ माना जाता है, इनके जन्म स्थान को अब ‘श्री गुरु रविदास जन्म स्थान’ कहा जाता है। 
रविदास जी को बचपन से ही उच्च कुल वालों की हीन भावना का शिकार होना पड़ा था, रविदास जी ने समाज को बदलने के लिए अपनी कलम का सहारा लिया, वे अपनी रचनाओं के द्वारा जीवन के बारे में लोगों को समझाते, लोगों को शिक्षा देते कि इन्सान को बिना किसी भेदभाव के अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना चाहिए। बचपन में रविदास जी अपने गुरु पंडित शारदा नन्द की पाठशाला में शिक्षा लेने जाया करते थे किन्तु कुछ समय बाद ही उच्च कुल के लोगों ने उनका वहां जाना भी बंद करा दिया। किन्तु गुरु शारदा नन्द ने रविदास जी की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर शिक्षित किया। 
रविदास जी की पत्नी  का नाम श्रीमती लोना एंव उनके बेटे का नाम विजय दास था। रविदास जी के अनुयाईयों का मानना है कि रविदास जी ने 120 या 126 वर्ष में अपने शरीर का त्याग कर दिया था। वैसे तो रविदास जी के कई अनुयायी और शिष्य थे पर उन सब में मीराबाई का नाम प्रमुख है। मीराबाई राजघराने से थीं किन्तु फिर भी उन्होंने रविदास जी को अपना गुरु बनाया जिसका विरोध ब्राह्मण समुदाय सहित सभी क्षत्रिय समुदायों ने किया। किन्तु मीराबाई ने किसी की न मानी और रविदास जी से गायन, वादन सहित शास्त्रों की भी विद्या ग्रहण की।