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सुख समृद्धि के लिए कीजिये रोहिणी व्रत! (Rohini Fast: For Happiness and Prosperity!)

भारत में बहुत से धर्म के लोग रहते हैं जिन धर्मों में से एक प्रमुख धर्म ’जैन धर्म’ है, सभी धर्मों के अपने विशेष उपवास एंव व्रत होते हैं, उसी प्रकार जैन धर्म में भी एक महत्वपूर्ण व्रत है रोहिणी व्रत, महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखती हैं, मान्यता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को करता है उसे अपने सभी दुख और दर्द से छुटकारा मिल जाता है, इस व्रत को एक साधारण व्रत न मानकर एक त्यौहार की तरह माना गया है, इस दिन दान देने का विशेष महत्व होता है।
 
रोहिणी व्रत का महत्व:-

अमूमन हर व्रत की तरह यह व्रत भी महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना गया है, ऐसा नहीं है कि इस व्रत को पुरूष नहीं रख सकते, मगर जैन परिवारों की महिलाओं के लिए इस व्रत का पालन करना अति आवश्यक माना गया है, यह व्रत ’रोहिणी नक्षत्र’ से जुड़ा है, इस दिन पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है, जैन धर्म के लोग इस पूजा में भगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं, महिलाएं इस व्रत में अपने पति की लम्बी आयु एंवम स्वास्थ्य की कामना करती हैं, इस व्रत को करने से धन, धान्य और सुखों में वृद्धि होती है, इस दिन व्रती भगवान से अपने अपराधों की क्षमा मांग कर मुक्त हो जाते हैं।
 
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रोहिणी व्रत की पूजा विधि:-

रोहिणी व्रत के दिन महिलाएं सुबह सवेरे जल्दी उठकर नित्य क्रिया कर स्नान आदि से पवित्र होकर पूजा करती हैं, इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा अर्चना की जाती है, पूजा के लिए भगवान वासुपूज्य की पांचरत्न, ताम्र या स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है, वासुपूज्य की अराधना करके दो वस्त्रों फल, फूल और नैवेध्य का भोग लगाया जाता है, इस दिन गरीबों को दान देने का भी बड़ा महत्व है।
 
रोहिणी व्रत की उद्यापन विधि:-

यह व्रत एक निश्चित समय तक ही किया जाता है, इस व्रत को कब तक करना है ये व्रत रखने वाले पर निर्भर करता है, मानी गई व्रत अवधि पूर्ण होने पर इस व्रत का उद्यापन कर दिया जाता है, उद्यापन के दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा की जाती है साथ ही साथ दर्शन भी किये जाते हैं, सामान्यतः इस व्रत के लिए 5 वर्ष 5 माह की अवधि श्रेष्ठ मानी गई है, उद्यापन के लिए इस व्रत को नियमित रूप से करके गरीबों को भोजन कराया जाता है।

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रोहिणी व्रत की तिथि:-

धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप जैन समुदाय में कुल 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र रोहिणी नक्षत्र होता है, यह व्रत प्रतिमाह आता है, यह त्यौहार सामान्यता प्रत्येक महीने के 27वें दिन रोहिणी नक्षत्र में पड़ता है, इस प्रकार रोहिणी व्रत पूरे साल में 13 बार मनाया जाता है, इस व्रत को 3, 5 या 7 वर्षों तक करने के बाद उसका उद्यापन किया जा सकता है।

 

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